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वो बच्चे जो Doctor, Police और Army बनेंगे — हमें बस एक किताब देनी है रांची की गलियों में बड़े-बड़े सपने छुपे हैं। बस किसी को उन्हें ज़मीन देनी है।
कुछ दिन पहले जब हम बच्चों के बीच बैठे और पूछा — "बड़े होकर क्या बनोगे?" — तो जो जवाब आए, वो दिल को छू गए।
कोई बोला "Doctor बनूँगा", कोई बोला "Army में जाऊँगा", एक छोटी बच्ची ने कहा — "मैं Police बनूँगी, गरीबों की मदद करूँगी।"
आँखों में वो चमक थी जो किसी कीमत पर नहीं खरीदी जा सकती। पर उन्हीं आँखों के पीछे एक सवाल भी था — "क्या मुझे मौका मिलेगा?"
जब किताब ही न हो, तो पढ़ोगे कैसे?
भारत में लाखों बच्चे हैं जिनके घर में खाने के लिए पैसे मुश्किल से आते हैं। किताब, कॉपी, पेन — ये उनके लिए luxury बन जाती है।
स्कूल तो हैं। टीचर भी हैं। बच्चों में पढ़ने की इच्छा भी है।
बस नहीं है तो — एक कॉपी। एक किताब। एक पेन।
और इसी एक कमी की वजह से कितने सपने आधे रह जाते हैं।
Krishna Sarthi ने यही देखा। यही महसूस किया। और फिर निकल पड़े — सीधे उन बच्चों के पास, जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी।
हम क्या करते हैं — और क्यों?
हम कोई बड़ी संस्था नहीं हैं। हमारे पास न बड़ा दफ़्तर है, न बड़ा बजट। हम हैं बस कुछ लोग — जो यह मानते हैं कि "निकलने से बदलाव होता है, बात करने से नहीं।"
हमारा Education Support कार्यक्रम सीधा और साफ़ है —
हम उन बच्चों तक पहुँचते हैं जो पढ़ना चाहते हैं पर साधन नहीं हैं। उन्हें किताबें देते हैं, कॉपियाँ देते हैं, स्टेशनरी देते हैं। और सिर्फ सामान नहीं — उनके साथ बैठते हैं, उनकी बात सुनते हैं, उन्हें यह एहसास दिलाते हैं कि तुम अकेले नहीं हो।
एक बच्चे की पढ़ाई — पूरे देश की ताकत
जब एक बच्चा पढ़ता है, तो सिर्फ वो नहीं बदलता।
उसका परिवार बदलता है। उसका मोहल्ला बदलता है। एक दिन, वही बच्चा Doctor बनकर गाँव की clinic खोलता है। Army Officer बनकर देश की सीमा पर खड़ा होता है। Teacher बनकर अगली पीढ़ी को रास्ता दिखाता है।
शिक्षा सेवा नहीं है — शिक्षा निवेश है। देश के भविष्य में।
इसीलिए हमने अपने कार्यक्रम का नाम रखा है — "पढ़ो, बढ़ो, देश के लिए तैयार हो।"
रांची के बच्चों की आँखों में भारत का कल है
हमने RIMS के बाहर भूखे लोगों को खाना दिया — वो ज़रूरी था।
हमने RIMS Road को साफ किया — वो भी ज़रूरी था।
पर सबसे ज़रूरी है — उन बच्चों को तैयार करना, जो कल इस देश को सँभालेंगे।
रांची के एक छोटे से कमरे में बैठा वो बच्चा जो Doctor बनना चाहता है — वो सिर्फ अपने लिए नहीं पढ़ेगा। वो उन सब लोगों के लिए पढ़ेगा जो RIMS के बाहर बिना इलाज के बैठे हैं।
हमें बस उसे एक किताब देनी है।
आप भी इस मिशन का हिस्सा बनिए
Krishna Sarthi अकेले नहीं लड़ रहा। हम तीन हैं — आप चौथे बन सकते हो।
₹250 में एक बच्चे को किताबें और कॉपियाँ मिल सकती हैं।
₹100 में एक बच्चे की स्टेशनरी का इंतज़ाम हो सकता है।
पर सिर्फ पैसों से नहीं — अगर आप रांची में हैं और कुछ घंटे निकाल सकते हैं, तो हमारे साथ आइए। उन बच्चों के साथ बैठिए। उन्हें पढ़ाइए।
हर रुपया सीधे उन बच्चों तक जाएगा — कोई बिचौलिया नहीं, कोई overhead नहीं।
क्योंकि जो बच्चा आज पढ़ेगा, वही कल देश बनाएगा 🇮🇳
हमारा मानना है — सेवा सिर्फ पेट भरना नहीं है। सेवा वो है जो किसी की ज़िंदगी बदल दे।
और एक बच्चे को शिक्षा देना — यही सबसे बड़ी सेवा है।
"इन बच्चों की आँखों में ही भारत का भविष्य बसता है।"
🙏 Donate करें · Volunteer बनें · हमारा काम Share करें
krishnasarthi.in | 📍 Ranchi, Jharkhand | 📞 +91 85788 86935
कोई बोला "Doctor बनूँगा", कोई बोला "Army में जाऊँगा", एक छोटी बच्ची ने कहा — "मैं Police बनूँगी, गरीबों की मदद करूँगी।"
आँखों में वो चमक थी जो किसी कीमत पर नहीं खरीदी जा सकती। पर उन्हीं आँखों के पीछे एक सवाल भी था — "क्या मुझे मौका मिलेगा?"
जब किताब ही न हो, तो पढ़ोगे कैसे?
भारत में लाखों बच्चे हैं जिनके घर में खाने के लिए पैसे मुश्किल से आते हैं। किताब, कॉपी, पेन — ये उनके लिए luxury बन जाती है।
स्कूल तो हैं। टीचर भी हैं। बच्चों में पढ़ने की इच्छा भी है।
बस नहीं है तो — एक कॉपी। एक किताब। एक पेन।
और इसी एक कमी की वजह से कितने सपने आधे रह जाते हैं।
Krishna Sarthi ने यही देखा। यही महसूस किया। और फिर निकल पड़े — सीधे उन बच्चों के पास, जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी।
हम क्या करते हैं — और क्यों?
हम कोई बड़ी संस्था नहीं हैं। हमारे पास न बड़ा दफ़्तर है, न बड़ा बजट। हम हैं बस कुछ लोग — जो यह मानते हैं कि "निकलने से बदलाव होता है, बात करने से नहीं।"
हमारा Education Support कार्यक्रम सीधा और साफ़ है —
हम उन बच्चों तक पहुँचते हैं जो पढ़ना चाहते हैं पर साधन नहीं हैं। उन्हें किताबें देते हैं, कॉपियाँ देते हैं, स्टेशनरी देते हैं। और सिर्फ सामान नहीं — उनके साथ बैठते हैं, उनकी बात सुनते हैं, उन्हें यह एहसास दिलाते हैं कि तुम अकेले नहीं हो।
एक बच्चे की पढ़ाई — पूरे देश की ताकत
जब एक बच्चा पढ़ता है, तो सिर्फ वो नहीं बदलता।
उसका परिवार बदलता है। उसका मोहल्ला बदलता है। एक दिन, वही बच्चा Doctor बनकर गाँव की clinic खोलता है। Army Officer बनकर देश की सीमा पर खड़ा होता है। Teacher बनकर अगली पीढ़ी को रास्ता दिखाता है।
शिक्षा सेवा नहीं है — शिक्षा निवेश है। देश के भविष्य में।
इसीलिए हमने अपने कार्यक्रम का नाम रखा है — "पढ़ो, बढ़ो, देश के लिए तैयार हो।"
रांची के बच्चों की आँखों में भारत का कल है
हमने RIMS के बाहर भूखे लोगों को खाना दिया — वो ज़रूरी था।
हमने RIMS Road को साफ किया — वो भी ज़रूरी था।
पर सबसे ज़रूरी है — उन बच्चों को तैयार करना, जो कल इस देश को सँभालेंगे।
रांची के एक छोटे से कमरे में बैठा वो बच्चा जो Doctor बनना चाहता है — वो सिर्फ अपने लिए नहीं पढ़ेगा। वो उन सब लोगों के लिए पढ़ेगा जो RIMS के बाहर बिना इलाज के बैठे हैं।
हमें बस उसे एक किताब देनी है।
आप भी इस मिशन का हिस्सा बनिए
Krishna Sarthi अकेले नहीं लड़ रहा। हम तीन हैं — आप चौथे बन सकते हो।
₹250 में एक बच्चे को किताबें और कॉपियाँ मिल सकती हैं।
₹100 में एक बच्चे की स्टेशनरी का इंतज़ाम हो सकता है।
पर सिर्फ पैसों से नहीं — अगर आप रांची में हैं और कुछ घंटे निकाल सकते हैं, तो हमारे साथ आइए। उन बच्चों के साथ बैठिए। उन्हें पढ़ाइए।
हर रुपया सीधे उन बच्चों तक जाएगा — कोई बिचौलिया नहीं, कोई overhead नहीं।
क्योंकि जो बच्चा आज पढ़ेगा, वही कल देश बनाएगा 🇮🇳
हमारा मानना है — सेवा सिर्फ पेट भरना नहीं है। सेवा वो है जो किसी की ज़िंदगी बदल दे।
और एक बच्चे को शिक्षा देना — यही सबसे बड़ी सेवा है।
"इन बच्चों की आँखों में ही भारत का भविष्य बसता है।"
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